तकिया मस्जिद भूमि विवाद में फिर नया मोड़, लेखपाल की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल
IGRS रिपोर्ट में मस्जिद भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने का दावा, प्रथम पक्ष ने निष्पक्ष स्थलीय नापी और सीमांकन की मांग उठाई
सोनभद्र। ग्राम पंचायत तकिया स्थित मस्जिद की भूमि को लेकर करीब एक वर्ष से चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। मस्जिद की भूमि पर कथित अतिक्रमण, सीमांकन और निर्माण को लेकर पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनती रही है। मामला चौकी से लेकर कोतवाली और उपजिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच चुका है। अब जनसुनवाई IGRS पोर्टल शिकायत संख्या 40020026016540 पर लगाई गई रिपोर्ट को लेकर प्रथम पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं।
बताया गया है कि मस्जिद की भूमि गाटा संख्या-80, खाता संख्या-00487 के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। वर्तमान में मस्जिद परिसर में पुनर्निर्माण कार्य भी चल रहा है। इसी को देखते हुए प्रथम पक्ष की ओर से भूमि की राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्थलीय नापी, सीमांकन और खुटाबंदी कराए जाने की मांग IGRS के माध्यम से की गई थी, ताकि मस्जिद की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सके और भविष्य में किसी नए विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
लेकिन शिकायत के निस्तारण में लगाई गई लेखपाल की रिपोर्ट ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट में कथित तौर पर मस्जिद की भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना बताया गया है। इसी रिपोर्ट को लेकर प्रथम पक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि वास्तव में मस्जिद की पूरी भूमि अतिक्रमणमुक्त है तो मस्जिद परिसर की पक्की बाउंड्री कराने और भूमि की खुटाबंदी कराने में आखिर अड़चन क्यों आ रही है?
रिपोर्ट की निष्पक्षता पर उठे सवाल
प्रथम पक्ष का आरोप है कि मस्जिद की भूमि का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से कथित रूप से दूसरे लोगों के उपयोग में है। उनका दावा है कि लगभग 6 बिसवा भूमि अतिक्रमण में होने की बात सामने आती रही है तथा भूमि के अलग-अलग हिस्सों का व्यक्तिगत उपयोग, खेती और पक्के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि मौके पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं है तो राजस्व अभिलेखों के आधार पर दोबारा स्वतंत्र एवं पारदर्शी नापी-सीमांकन कराने में परेशानी क्या है?
प्रथम पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान लेखपाल द्वारा लगाई गई रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि रिपोर्ट में अतिक्रमण नहीं होने की बात कही गई है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष लगातार मौके पर भूमि की सीमा स्पष्ट कराने और खुटाबंदी की मांग कर रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और विपक्षी पक्ष का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
एक रिपोर्ट से कैसे साफ होगी वर्षों से उलझी जमीन की हकीकत?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दोनों पक्ष भूमि की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं, तो क्या केवल एक रिपोर्ट के आधार पर विवाद का पटाक्षेप किया जा सकता है?
प्रथम पक्ष का कहना है कि गाटा संख्या-80 की राजस्व अभिलेखों के अनुसार विधिवत नापी कराई जाए, चारों ओर की सीमाएं मौके पर स्पष्ट की जाएं और आवश्यकतानुसार सीमांकन चिन्ह स्थापित किए जाएं। यदि नापी में अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण सामने आता है तो संबंधित पक्ष को नियमानुसार नोटिस देकर कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोबारा सीमांकन की मांग
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध कार्रवाई कराने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि की वास्तविक स्थिति मौके पर स्पष्ट कराने के लिए की गई है।
प्रथम पक्ष का कहना है कि मस्जिद परिसर में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है और यदि भूमि की सीमा अभी स्पष्ट नहीं की गई तो भविष्य में विवाद और बढ़ सकता है। इसलिए राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में निष्पक्ष स्थलीय नापी, सीमांकन और खुटाबंदी कराई जानी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन IGRS पर लगाई गई रिपोर्ट को अंतिम मानता है या पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजस्व अभिलेखों के आधार पर दोबारा संयुक्त एवं निष्पक्ष स्थलीय नापी कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करता है।
फिलहाल लेखपाल की रिपोर्ट ने एक बार फिर गांव में चर्चा को तेज कर दिया है और सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि मस्जिद की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं है, तो राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके पर निष्पक्ष सीमांकन और खुटाबंदी कराने में आखिर आपत्ति किसे और क्यों है?







0 टिप्पणियाँ